हैलो दोस्तों!
कैसे हैं आप सभी? आज मैं एक बहुत ज़रूरी बात लेकर आया हूँ। ये बात है हमारी ज़मीन, हमारी पुश्तैनी संपत्ति से जुड़ी। कभी-कभी लगता है कि ज़मीन-जायदाद के कागज़ात तो वकीलों और दलालों के हिसाब से ही चलते हैं। लेकिन अब नहीं! सरकार ने ज़मीन रजिस्ट्री के नियमों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। ये बदलाव हम जैसे आम लोगों के लिए बहुत फ़ायदेमंद हैं, पर साथ ही सतर्कता भी बढ़ा दी है।
मेरे एक रिश्तेदार का तो पिछले महीने ही एक deal रुक गया, सिर्फ एक दस्तावेज़ की कमी के कारण। उनकी परेशानी देखकर मन बहुत दुखी हुआ। ऐसा न हो कि हममें से कोई भी इन नए नियमों से अनजान होने के कारण ऐसी मुसीबत में फंस जाए। इसलिए, आइए जानते हैं कि अब ज़मीन रजिस्ट्री करवाते समय हमें किन-किन बातों का खास ख्याल रखना होगा।
क्या हैं ये नए guidelines? (मुख्य बिंदु)
पहले की तुलना में अब प्रक्रिया और स्पष्ट व सुरक्षित बनाई गई है। लेकिन साथ ही, कुछ documents की अनिवार्यता को लेकर सख्ती बरती जाएगी। यदि ये दस्तावेज़ नहीं हैं, तो रजिस्ट्री अधिकारी काम रोक देंगे। कोई छूट नहीं मिलेगी।
वो कौन से ज़रूरी दस्तावेज़ हैं? (Mandatory Documents List)
- मालिकाना हक का सबूत: यह सबसे पहली और ज़रूरी शर्त है। पुराना registry (बिक्री-पत्र), उत्तराधिकार (विरासत) का दस्तावेज़, गिफ्ट डीड, या कोर्ट का ऑर्डर। यह दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से बताता हो कि विक्रेता ही ज़मीन का कानूनी मालिक है।
- 7/12 और 8-A खतौनी (यानी Land Records): यह दस्तावेज़ राजस्व विभाग से मिलता है। इसमें ज़मीन का सटीक विवरण, क्षेत्रफल, मालिक का नाम और किसी तरह का ऋण (loan) या दावा (encumbrance) दर्ज है या नहीं, ये सब जानकारी होती है। इसे online भी चेक कर सकते हैं।
- मौजूदा खसरा नक्शा (Map): यह नक्शा ज़मीन की सीमाएं और उसकी geographical स्थिति दिखाता है। यह confirm करने के लिए ज़रूरी है कि जो ज़मीन बिक रही है, उसका map record में दर्ज ज़मीन से मेल खाता है।
- नवीनतम टैक्स की रसीद: सभी संपत्ति कर (property tax) का भुगतान पूरा होना चाहिए। अदायगी की latest रसीद जमा करनी अनिवार्य है। यह साबित करती है कि ज़मीन पर कोई government dues नहीं है।
- पहचान पत्र (Identity Proof) और फोटो: खरीदार और विक्रेता दोनों के वैध पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी) और पासपोर्ट साइज की ताज़ा फोटोज़।
- नॉन-एग्रीकल्चरल (NA) ऑर्डर: अगर कृषि भूमि को गैर-कृषि (residential/commercial) उपयोग के लिए बेचा जा रहा है, तो NA की अनुमति होना ज़रूरी है। बिना इसके registry नहीं होगी।
क्या है बदलाव का मकसद?
मेरी feeling यह है कि इन नियमों का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और धोखाधड़ी रोकना है। अक्सर देखा गया है कि बाद में दस्तावेज़ों को लेकर झगड़े होते हैं, ज़मीन के कागज़ात गड़बड़ होते हैं। इन नए guidelines से buyer और seller दोनों का भरोसा कायम रहेगा। डील transparent तरीके से होगी। सरकार का यह कदम वाक़ी सराहनीय लगता है।
आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
- सबसे पहले, वकील से सलाह ज़रूर लें। एक अच्छा वकील सारे दस्तावेज़ों की जांच करेगा।
- Title Search और Encumbrance Certificate: पिछले 30-40 वर्षों का encumbrance certificate ज़रूर लें। यह बताएगा कि ज़मीन पर कभी कोई loan था या कानूनी case तो नहीं चला।
- मौके पर जाएँ (Site Visit): जिस ज़मीन की रजिस्ट्री करवा रहे हैं, उसे personal visit करके देखें। पड़ोसियों से बात करें, confirm करें कि कोई dispute तो नहीं है।
- ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग: अब ज़्यादातर राज्यों में land records online उपलब्ध हैं। इनकी मदद से आप खुद भी कुछ basic checks कर सकते हैं।
निष्कर्ष:
दोस्तों, ज़मीन की खरीद-बिक्री जीवन का एक बहुत बड़ा फैसला होता है। इसमें जल्दबाज़ी या लापरवाही भारी पड़ सकती है। सरकार के ये नए नियम हमारी मदद के लिए हैं, हमें सुरक्षित रखने के लिए हैं। इनका पालन करके हम न सिर्फ अपना पैसा सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाले तनाव और मुकदमेबाज़ी से भी बच सकते हैं।
तो अगली बार जब भी कोई deal करें, इन बातों का ध्यान रखें। सही information और सतर्कता ही सफलता की कुंजी है।
आशा है ये जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी। अगर लगे कि ये post किसी के काम आ सकती है, तो ज़रूर शेयर करें। कोई सवाल हो तो comment में पूछ सकते हैं।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें!
शुभकामनाएं।










